21. जन्मदिन 

जिन्दगी के हर बात से परेशान था

दिल में पता नहीं किस बात का अरमान था

एक लड़की के जिस्म के साथ एक अजीब सौदा हो गया

उसकी आग में जल के एक नया कवि पैदा हो गया

Advertisements

20. चाय 

राष्ट्रवाद के नाम की चाय में 

सांप्रदायिक अफीम मिलाई गई है 

बिना बताए सबको पिलाई गई है 

कल तक थी तिरंगे में लिपटी भारत माँ 

आज गेरुआ हिंदुस्तान हो गया 

कल तक थे जो ख़ान भाई अपने 

आज एक मुसलमान हो गया 

19. आंधी 

एक आधीँ चल रही है

बाहर और भीतर

बूदोँ के आसार है

बाहर और भीतर

कब तक एक ही घोँसले मेँ

दिन गुजारे कोई

अब समय है उड़ने का

सोचता हू इस आधीँ के साथ उड़ जाऊँ

क्या पता शायद जमाने से आगे निकल जाऊँ

18. Poems that never existed

He was a depressed man

in his mid-twenties

worked ten hours a day

lived alone, far from his family.

In his lonely room

he read some books

he wrote some poems

not many,

eighty to hundred maybe

concealed in a black notebook.

One day he died in an accident

his parents took his body home

the notebook was burnt

along with his body

All his poems

faded out of existence

along with him.